Safar
सफर,
खुद को ढूंढ ने, उन् यादो के बक्से में डूबने,
चल पडा में युंही एक सफर में.
मिलना हे अपने आप से , खुद से करनी हे कुछ बातें ,
समझना हे दिल को थोड़ा , और थोड़ा दिमाग को भी समझाना हे.
इधर तू ही अपना सफर हे, तू ही अपनी मंज़िल,
इस सफर में,
तू ही अपना खुदा हे और तू ही अपना गुलाम.
कुछ खो सा गया में यूं दुसरो की खुशियों में,
बेच के खुदको , उन खुशियों के बाजार में,
अपने सपनो का कर्ज़ा भी चूका दिया,
पर ,
पर ,
उस रंगबेरंगी बाजार में ,
खुद , खुद के लिए अलग हे और दुसरो के लिए अलग हे.
इधर तू ही अपना नक़ाब हे.
इधर तू ही अपनी मशाल हे.
सोचु यूँ निकल जाऊ कहीं अकेले ,
चला जाऊ कहीं दूर में ,
थकना , रुकना फिर से दौड़ना ,
अपने सारे दर्द को कौन समजे यहाँ ,
अपने ख्वाबो के पंख को कौन खींचे यहाँ,
खुद को समजने यूँ निकल पड़ा हु एक सफर में
इधर तुहि अपनी आग हे , और तुहि अपना शोला हे .
इस अँधेरे में एक तू ही अपनी रौशनी हे.
तू ही अपनी रौशनी हे.

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